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भोपाल

 

भोपाल आनलाइन एडमिशन के दो चरण समाप्त होने के बाद भी सरकारी कॉलेज छात्रों के एडमिशन के लिए तरस रहे हैं। हालात यह है कि हमीदिया में कुल छात्र क्षमता के मात्र 10 फीसदी सीटों पर ही प्रवेश हो सका है। ऐसा ही हाल बेनजीर, नवीन, नूतन सहित राजधानी के दूसरे सरकारी कॉलेजों का भी है। दो चरणों की समाप्ति के बाद भी कॉलेज 50 फीसदी छात्रों के एडमिशन के लिए तरस गए हैं। शैक्षणिक सत्र 2012-13 में प्रवेश के लिए जारी काउंसलिंग का दूसरा चरण 27 जून को समाप्त हो गया। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश में शिक्षा और सरकारी कॉलेजों की गुणवत्ता सुधारने के लिए किए गए प्रयासों का कोई नतीजा सामने आता नहीं दिखाई दे रहा है। विभाग के लाख जतन के बाद भी प्रदेश के छात्र सरकारी कॉलेजों में पढ़ना नहीं चाहते हैं। प्रदेश के 1100 कॉलेजों में तीन लाख सीटे हैं। इनमें से अभी तक करीब 65 हजार सीटों पर ही प्रवेश हो पाया है। आनलाइन एडमिशन के पहले चरण में 61 हजार 300 विद्यार्थियो ने प्रवेश लिया था। दूसरी सूची में 12 हजार छात्रों को कॉलेज आवंटित किया गया था,

जिसमें से करीब तीन हजार विद्यार्थियों ने ही प्रवेश लिया है। कॉलेजों में प्रवेश से दूर भाग रहे छात्रों के कारण कॉलेजों की खासकर सरकारी कॉलेजों की स्थिति बुरी हो गई है।

 

हमीदिया कॉलेज में मात्र 10 फीसदी एडमिशन

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दूसरे चरण के बाद विभिन्न सरकारी और गैरसरकारी कॉलजों में खाली रह गई सीटों को विभागीय पोर्टल पर प्रदर्शित किया गया है। इसके अनुसार, राजधानी के हमीदिया कॉलेज की स्थिति काफी खराब है। हमीदिया कॉलेज में आर्ट्स और कॉमर्स की 1300 सीटों में से अभी तक केवल 130 सीटों पर ही छात्रों को एडमिशन दिया जा सका है। हमीदिया कॉलेज में आर्ट्स की कुल 500 सीटें हैं, जिनमें से अभी सिर्फ 33 सीटों पर ही छात्रों का प्रवेश हो पाया है, यानी अभी भी 467 सीटें खाली हैं। वहीं कॉमर्स की 800 सीटों में से मात्र 97 सीटों पर ही प्रवेश हुए हैं।



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