अलकायदा ने बनाया अब ‘बुर्का ब्रिगेड’

लंदन।आतंकवादी संगठन अलकायदा ने पश्चिमी देशों के सैन्य ठिकानों एवं आधिकारिक इमारतों पर हमले के लिए महिला शाखा ‘बुर्का ब्रिगेड’ का गठन किया है। अलकायदा की ओर से जारी आनलाइन फिल्म में महिला सदस्यों को मशीनगन, रॉकेट लांचर सहित कई घातक हथियारों को चलाते दिखाया गया है। ब्रिटिश टैबलॉयड ‘द सन’ के अनुसार अलकायदा से जुड़े एक समूह ने संभवत: रूस के युद्धग्रस्त क्षेत्र चेचेन्या से महिला आतंकियों की भर्ती की है। जानकारों का कहना है कि महिला आतंकवादियों पर उनके पुरुष साथियों के मुकाबले कम संदेह होगा, इसी के मद्देनजर अलकायदा ने महिला ब्रिगेड तैयार की है माना जा रहा है कि इन्हें हमले की जवाबदारी सौंपी जा चुकी है।

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कश्मीर में हिंसा फैलाना चाहता है जरगर

इस्लामाबाद। इंडियन एयरलाइंस के एक अपहृत विमान के यात्रियों की रिहाई के बदले छोड़े गए 3 आतंकियों में शामिल मुश्ताक अहमद जरगर ने अपने अल उमर मुजाहिदीन संगठन के जरिए पाक अधिकृत कश्मीर से जम्मू-कश्मीर में सशस्त्र संघर्ष को पुनर्जीवित करने का फैसला किया है। मौलाना मसूद अजहर और अहमद उमर सईद शेख के साथ श्रीनगर निवासी जरगर उर्फ लाटराम की रिहाई के बाद उसके बारे में बहुत कम सूचना मिली। इन तीनों को उड़ान आईसी 814 के यात्रियों की रिहाई के बदले छोड़ा गया था। पाकिस्तानी आतंकी इस विमान का अपहरण कर उसे नेपाल में काठमांडो से अफगानिस्तान में कंधार ले गए थे। 

चाहता है कश्मीर की आजादी- जरगर अल उमर मुजाहिदीन का प्रमुख है और अपनी रिहाई के बाद से वह पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद में रह रहा था। अफजल गुरु को फांसी की सजा दिए जाने के बाद उसने अपने संगठन को फिर से सक्रिय करने का फैसला किया। हालिया साक्षात्कारों में जरगर ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर मुद्दे का एक मात्र समाधान सशस्त्र संघर्ष है। उसने कहा था कि उसका लक्ष्य जम्मू-कश्मीर को सशस्त्र संघर्ष के जरिए आजाद कराना है। उसने कहा, धन, आदमी और हथियार हम कहीं से भी प्राप्त कर सकते हैं। हम अभी भी नियंत्रण रेखा के दोनों ओर प्रशिक्षण केंद्र चला रहे हैं। पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान ने देश में जरगर की मौजूदगी के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की थी, पर वह 1999 में अपनी रिहाई के बाद से मुजफ्फराबाद में रह रहा था। वहीं, मसूद अजहर आज-कल जैश ए मोहम्मद का प्रमुख है। उसने भी कहा है कि वह जम्मू-कश्मीर में जिहाद तेज करना चाहता है। वाल स्ट्रीट जनरल के पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या के सिलसिले में कराची की एक अदालत ने अहमद उमर सईद शेख को मौत की सजा सुनाई थी।

12 साल बाद मिला 9/11 हमले का सबूत

न्यूयार्क। 9/11 के आतंकी हमले को अंजाम देने वाले अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को भले ही अमेरिका ने उसके अंजाम तक पहुंचा दिया गया हो, लेकिन उस खौफनाक मंजर का एक सबूत फिर मिला है। 11 सितंबर 2001 को न्यूयार्क (अमेरिका) के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराने वाले दो विमानों में से एक का टुकड़ा अब जाकर मिला है। न्यूयार्क पुलिस ने कहा है कि यह टुकड़ा उसे निचले मैनहटन में दो कार्यालयों की इमारत के बीच जमीन में धंसा हुआ मिला। ये दोनों इमारतें-51 पार्क प्लेस और 50 मरे स्ट्रीट हमले के स्थान ग्राउंड जीरो से मात्र दो ब्लॉक की दूरी पर स्थित हैं। इन दोनों इमारतों के बीच बहुत ही संकरी गलीनुमा जगह है। यह इतनी संकरी है कि आने-जाने के लिए इनका उपयोग नहीं किया जा सकता है। जांचकर्ता अब यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि करीब 12 वर्षों तक इस स्थान पर उनकी नजर क्यों नहीं पड़ी।

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अमेरिकियों को आशंका, हो सकता है आतंकी हमला

वाशिंगटन। बोस्टन में हुए विस्फोटों के तत्काल बाद कराई गई रायशुमारी में आधे अमेरिकी नागरिकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कोई आतंकवादी हमला हो सकता है। यह रायशुमारी गैलप ने कराई है। बोस्टन विस्फोटों में तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। गैलप ने कहा कि ताजा रायशुमारी में शामिल किए गए लोगों में से 51 प्रतिशत नागरिकों का मानना था कि आतंकवादी हमला होने की अधिक आशंका है। गैलप ने कहा कि 9/11 हमले के 10 साल पूरा होने के बाद अगस्त 2011 में कराई गई रायशुमारी में 38 प्रतिशत लोगों ने आतंकवादी हमला होने की आशंका जताई थी
ई है।

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