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कला और संस्कृति

भोपाल।उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत अकादमी में रविवार को पेंटिंग एग्जीबिशन का आयोजन किया गया। एग्जीबिशन में चित्रकार राज सैनी और आरके क्रिएशंस द्वारा आयोजित पेंटिंग वर्कशॉप में बच्चों द्वारा तैयार की गई लगभग 100 पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई। इसमें 6-7 साल तक के बच्चों ने कार्टून, चिड़िया, अन्य चीजें और नेचुरल ब्यूटी में फूल, बेल पत्तियां और झरनों के माध्यम से अपनी सकारात्मक सोच का परिचय दिया। इसके अलावा युवाओं की मार्बल रॉक, कैनवास, नाइफ पेंटिंग और एम्ब्रॉज में भी अपना हुनर दिखाया। इनमें खास जबलपुर के भेड़ाघाट की सीनरी रही। वहीं कैनवास पर महाकाली, राजा रवि वर्मा की खास पेंटिंग भी देखने को मिली। चित्रकार राज सैनी ने बताया कि प्रदर्शित पेंटिंग्स 8 साल से लेकर 35 साल तक के युवा चित्रकारों की हैं। एग्जीबिशन का आयोजन बच्चों को मोटीवेट करने के उद्देश्य से किया गया है।। इस अवसर पर बच्चों को सर्टिफिकेट्स प्रदान किए गए।

कला और संस्कृति

सरल आर्ट गैलरी में शुक्रवार से शहर की चार महिला चित्रकारों की चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में प्रदर्शित चित्रों में कलाकारों की कल्पना की उड़ान कैनवास पर नजर आई। प्रदर्शनी में संगीता पाठक, वीणा जैन, अर्चना यादव और मोनिका बिजलानी के चित्रों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी का शुभारंभ एमवीएम की प्राचार्य आभा गार्गव ने किया। युवा चित्रकार अर्चना के कामों में एक ताजगी नजर आई। इनके चित्रों में रंगों का खासा खेल देखने को मिला। मोनिका बिजलानी के चित्रों को देख ऐसा लगता है कि हम खुद उस दृश्य में हैं। उनके चित्रों के चटख रंग देखने वालों को अपनी ओर खींचने में कामयाब हुए। संगीत पाठक का काम मूर्त विधा में देखने को

कला और संस्कृति

बेटी है, तो कल है..। प्रकृति का अनमोल तोहफा है बेटी यह जननी है, लक्ष्मी है और जरूरत होने पर दुर्गा- काली भी है। अगर समय रहते बेटियों की महत्ता को नहीं समझा गया, तो हमारी संकुचित सोच दुनिया के विनाश का कारण भी बन सकती है। कैनवास पर उकेरे चित्रों में ऐसे ही संदेशों की झलक देखने को मिली। दरअसल स्वराज वीथि में सोमवार से तीन दिवसीय बेटी बचाओ चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ, अर्टिस्ट गिल्ड आॅफ इंडिया द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी में लगभग 25 कलाकारों के चित्रों को प्रदर्शित किया गया, जिसका शुभारंभ वरिष्ठ चित्रकार सचिद नागदेव ने किया। देवीलाल पाटीदार ने बताया कि रंगों की अपनी भाषा होती है। पढ़ा

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