11-12-2018 09:06:pm
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नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों पर लगातार आलोचना झेल रही मोदी सरकार ने गुरुवार को पेट्रोल-डीजल पर लोगों को राहत दी। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने इनके दामों पर 1.5 रुपए एक्साइज ड्यूटी घटाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि तेल कंपनियां 1 रुपए प्रति लीटर दाम कम करेंगी। ऐसे में उपभोक्ताओं को प्रति लीटर 2.50 रुपए की राहत मिलेगी। जेटली ने राज्यों से भी पेट्रोल- डीजल पर वैट में इतनी ही राशि की कटौती करने की अपील की। इसके कुछ देर बाद ही मप्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, झारखंड, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, असम, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, और गोवा ने पेट्रोल-डीजल पर 2.50 रुपए वैट कम कर दिया। महाराष्ट्र ने सिर्फ पेट्रोल पर 2.50 रुपए वैट कम किया है। 

केंद्र सरकार ने 2 साल में 9 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई

नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच क्रूड के दाम कम होने पर केंद्र सरकार ने 9 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर पेट्रोल डीजल के दाम कम नहीं होने दिए। इस दौरान पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में 11.77 और डीजल पर ड्यूटी में 13.47 रुपए का इजाफा किया गया। 2017-18 में पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से सरकार ने 2.29 लाख करोड़ रु. की कमाई की। 

5 रुपए कमी के बाद... भोपाल में 100 रु. में पेट्रोल मात्र 60 ml और डीजल 90 ml ज्यादा मिलेगा

भोपाल। पेट्रोल और डीजल के दाम में 5 रुपए की कटौती के बाद जनता को खास राहत नहीं मिलने वाली। पेट्रोल पंप डीलर्स के मुताबिक 95 प्रतिशत से ज्यादा ग्राहक 100, 500 या 1000 रुपए का पेट्रोल- डीजल डलवाते हैं। अगर गुरुवार के दाम से 5 रुपए कम कर तुलना की जाए तो शुक्रवार को100 रुपए में सिर्फ 60 मिलीलीटर (एमएल) ज्यादा पेट्रोल और डीजल 90 एमएल ज्यादा ही मिलेगा। 

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट... राज्यों को दाम बढ़ने से 13 हजार करोड़ का फायदा, 4.60 रुपए तक घटा सकते हैं दाम

मुंबई। एसबीआई रिसर्च ने एक नोट में कहा है कि राज्य अपने राजस्व को प्रभावित किए बिना पेट्रोल पर 4.60 रुपए और डीजल पर 3.30 रुपए प्रति लीटर तक कटौती कर सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक र्इंधन की बढ़ती कीमतों के चलते राज्यों को 13,000 करोड़ रुपए का लाभ हुआ है। 

जनता की याददाश्त भले कमजोर हो, लेकिन वह जानती है कि राई जैसी यह राहत चुनावी है

माना कि जनता की याददाश्त कमजोर होती है, मगर जनता को याद होगा कि कुछ दिन पहले तक केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद कह रहे थे कि पेट्रोल-डीजल की कीमत तय करना सरकार के हाथ में नहीं है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का भी कहना था कि तेल की बढ़ती कीमतों के लिए अंतरराष्ट्रीय कारक जिम्मेदार हैं और बढ़ रही कीमतों के पीछे ईरान, वेनेजुएला और तुर्की जैसे देशों के वह हालात हैं, जिन्होंने तेल उत्पादन को प्रभावित किया है, फिर आज अचानक क्या हो गया ? जाहिर है मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव, जिन्हें 2019 का सेमीफाइनल माना जा रहा है। यानी जब चुनाव सर पर होते हैं तो अर्थव्यवस्था, अंतराष्ट्रीय मूल्यों में हो रही बढ़ोतरी या कीमतों के निर्धारण में सरकार हस्तक्षेप नहीं करती, जैसी भारी भरकम बातें गौण हो जाती हैं। एकमात्र लक्ष्य होता है चुनाव जीतना। दरअसल सरकार नहीं चाहती कि पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम चुनावी मुद्दा बनें। इसे रोकने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती की गई। शायद यही वजह है कि जैसे ही वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केंद्र सरकार की कटौती की घोषणा की उसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत भाजपा शाषित कई राज्यों ने वैट कम करने का ऐलान कर दिया। यह घोषणा करते समय नेताओं को अचानक जनता की तकलीफें नजर आने लगीं। लेकिन, जनता सब जानती है और उसे पता है कि 'राई' जैसी यह राहत चुनाव तक ही है। दरअसल, भाजपा ने पेट्रोल डीजल की कीमतों पर लगाम लगाने की शुरुआत गुजरात चुनाव के समय की थी। उस दौरान भाव स्थिर हो गए थे। फायदा भाजपा को मिला। इसी तरह कर्नाटक विधानसभा के दौरान भी रोज बढ़ने वाली कीमते 19 दिनों तक स्थिर रहीं, जबकि उस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में मानक मूल्यों में करीब तीन डॉलर प्रति बैरल की तेजी भी आई थी। मगर चुनाव से पहले तेल की कीमतें स्थिर कर देने से भाजपा को कर्नाटक में फायदा ही हुआ था। यानी भाजपा को यह समझ आ गया है कि पेट्रोल-डीजल की लगातार कीमतों पर लगाम नहीं लगाने का नुकसान उसे आगामी चुनावों में हो सकता है। बढ़ती कीमतों के खिलाफ विपक्ष के आंदोलन और जनता को हो रही परेशानी के बीच कई अहम सवाल पैदा होते हैं। इनमें से सबसे अहम सवाल यह है कि जब मोदी और शिवराज सरकार के पास महंगे होते पेट्रोलियम उत्पादों से लोगों को राहत देने के लिए विकल्प मौजूद था तो इनपर पहले गौर क्यों नहीं किया गया? कांग्रेस ने कहा हजारों घाव देकर मोदी सरकार ने बैंड एड लगाया पांच राज्यों के चुनावों में हार देखकर मोदी सरकार ने हजारों घाव देने के बाद अब बैंड-एड लगाने का काम किया है। मई 2014 से सरकार ने लोगों से 13 लाख करोड़ रुपए की लूट पेट्रोलियम उत्पादों पर कर के जरिए की है। प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को इसका जवाब देना चाहिए कि उन्होंने जनता के इस पैसे का किया क्या? -रणदीप सुरजेवाला, कांग्रेस प्रवक्ता

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