11-12-2018 07:06:pm
उत्तर पुस्तिका परीक्षक की राय का दस्तावेज, छात्र को इसकी प्रति देने से इंकार नहीं कर सकते विश्वविद्यालय: मप्र सूचना आयोग || माइन ब्लास्ट, दो जवान शहीद  || ब्रटेन के मंत्री ने दिया इस्तीफा || अफगानिस्तान में 10 आतंकवादी मारे  || ब्रह्मोस और एआरवी सहित 3000 करोड़ की सैन्य खरीद को मंजूरी  || असम में इंटरसिटी एक्स. के कोच में धमाका, 11 जख्मी  || कांग्रेस ने फिर मांगी स्ट्रॉन्ग रूम की डेढ़ घंटे की वीडियो रिकॉर्डिंग || चिदंबरम ने जीडीपी पर जश्न के लिए भाजपा का उड़ाया मजाक :  || एक माह में पेट्रोल-डीजल के दाम में 7 रुपए की कमी || भारत के लिए यह सीरीज जीतने का सुनहरा मौका : स्टीव || भारत ए की पारी 323 पर सिमटी, सिराज ने दो विकेट लिए  || जजों की नियुक्ति कॉलेजियम ही करेगा; सरकार की याचिका खारिज  || पंजाब के मंत्री बोले इस्तीफा दें सिद्धू  || राहुल ने कहा- कैसे हिंदू हैं मोदी; सुषमा ने कहा- दुविधा तो आपके धर्म पर है || प्रदर्शन में दिल्ली पहुंचे किसान ने आत्महत्या की || प्रियंका-निक जोनास बने जीवनसाथी || लोकपाल पर 30 जनवरी से अन्ना फिर मैदान में  || कबड्डी खिलाड़ी का करता था पीछा बात करने के लिए बना रहा था दबाव ||

भोपाल ।   मप्र राज्य सूचना आयोग ने कहा है कि विश्वविद्यालय किसी छात्र को उसकी परीक्षा उत्तर पुस्तिका की प्रति देने से इंकार नहीं कर सकते हैं। राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप गुप्ता की बेंच ने एक मामले में सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए हैं। आयुक्त ने कहा कि हैरत की बात है कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट व आयोग के स्पष्ट आदेश के बाद भी उसके पालने में कोताही बरती जा रही है। आयुक्त ने विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति व कुलसचिव को फिर से कड़ी फटकार लगाते हुए उनसे स्पष्टीकरण तलब किया है । साथ ही उन्हें निर्देशित किया है कि 10 दिसंबर को आयोग की कोर्ट में उपस्थित होकर अपनी सफाई पेश करें । आयोग ने कैलाश सनोलिया व अन्य परीक्षार्थियों की शिकायतों पर कुलपति व कुलसचिव को जारी कारण बताओ (एससीएन) नोटिस पर कुलपति व कुलसचिव द्वारा पेश किए उत्तर को अमान्य करते हुए एससीएन पर निर्णय सुरक्षित रखा है। आयोग ने तत्कालीन कुलसचिव डा परीक्षित सिंह के विरुद्ध भी एससीएन जारी करते हुए उन्हें 10 दिसंबर को आयोग के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है। आयोग ने कहा है कि अधिनियम के प्रावधानानुसार मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका परीक्षक की राय का दस्तावेज है जो धारा 2 के तहत ‘सूचना’ की परिभाषा के अंतर्गत आता है। नागरिकों को लोक प्राधिकारी के नियंत्रण या अधिकार में रखी ऐसी सभी सूचनाओं को पाने का अधिकार है। केन्द्रीय सूचना आयोग व विभिन्न राज्य सूचना आयोगों द्वारा पारित निणर्यों में भी अपनी उत्तरपुस्तिका की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के परीक्षार्थी के मौलिक अधिकार की पुष्टि की जा चुकी हैं । उक्त विधिक स्थिति से यह सुस्पष्ट है कि उत्तरपुस्तिका की प्रति प्रदाय करने से किसी भी अन्य निर्णय के आधार पर इंकार नहीं किया जा सकता है । इसके बावजूद वि.वि. द्वारा इंकार किए जाने के कारण कुलपति, कुलसचिव व तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी को 6 बिंदुओं पर स्पष्टीकरण पेश करने का आदेश देते हुए उनके विरुद्ध दंडात्मक क ार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।

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