11-12-2018 08:11:pm
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इंदौर। प्याज की बंपर पैदावार, निर्यात पर पाबंदी और बाहरी डिमांड न होने के चलते प्याज बोने वाला अन्नदाता मारा गया है। 6 रुपए किलो की लागत का प्याज बाजार में 1 रुपए मोल बिक रहा है। खेत से मंडी तक लाने का भाड़ा भी प्याज की बिकवाली से निकल पाना असंभव है। किसान औने-पौने दामों में प्याज बेचकर कर्ज में उलझने को मजबूर है। इंदौर की प्याज मंडी में खंडवा, राजवीर, बड़वानी, नासिक, उज्जैन, फतेहाबाद, महू, बुरहानपुर, धार का प्याज बिकने आता है। किसान एक से दो रुपए किलो प्याज बेचने को मजबूर हैं। मंडी में दाम न मिलने से काश्तकारों को माल भाड़ा तक जुटाने में परेशानी हो रही है।

3 कारणों से जमीन पर आए प्याज के दाम

1. किसानों ने इस साल प्याज का खूब रकबा बोया। उत्पादन भी बेहतर मिला।

2. प्याज की क्वालिटी कमजोर रही। अन्य प्रांतों में डिमांड नहीं बन पाई।

3. निर्यात पर पाबंदी से प्याज की मंडी में बंपर आवक।

1 महीने पहले 18 रुपए किलो था, अब 1 रुपए

प्याज कारोबारियों की मानें तो 1 महीने पहले प्याज का दाम 17 से 18 रुपए किलो था। इसके बाद 8 दिन के भीतर ही भाव 10-11 रुपए किलो हो गए और अब 1-2 रुपए किलो तक आ गए हैं।

आढ़तिए बोले : व्यापारी भी कर्जदार हो गया

प्याज की किसानों से खरीददारी कर उसे दूसरे प्रांतों में फैक्ट्री या अन्य कारोबारियों को भेजने वाले लोडर भी प्याज की गिरती कीमत से कर्जदार हो गए हैं। आढ़तियों की मानें तो एक महीने पहले बाजार में नए प्याज की आवक शुरू हुई थी और दाम 17-18 रुपए किलो थे। किसानों से प्याज खरीदकर उसे दूसरे प्रांतों तक पहुंचाने में 4-5 दिन लग गए। तब तक प्याज के दाम 9 से 11 रुपए हो गए। दाम में आई गिरावट से व्यापारी और लोडर भी कर्जदार हो गए। किसान तो माल बेचकर नकदी लेकर चलता बना। सारा नुकसान व्यपारी और लोडर के जिम्मे रहा।

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