11-12-2018 08:03:pm
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भोपाल। विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद सबसे पहली मार पेट्रोल और डीजल पर पड़ने वाली है। किसी भी पार्टी की सरकार बनने पर प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ाना पहली मजबूरी होगा, क्योंकि प्रदेश सरकार का बजट कर्ज लेकर चल रहा है। करीब 1.80 लाख करोड़ रुपए के कर्ज के हालात में सबसे ज्यादा और सबसे तेज रेवेन्यू जनरेट करने का उपाय पेट्रोल-डीजल पर टैक्स बढ़ाना होगा। विशेषज्ञों की मानें तो प्रदेश में पेट्रोल और डीजल के दाम चुनाव नतीजों के बाद 5 रु. तक बढ़ सकते हैं। गुजरात और कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम में धीरे-धीरे वृद्धि की गई थी। लेकिन मप्र में हालात अलग हैं। चुनावी मौसम में पेट्रोल पर करीब 15 रुपए और डीजल पर 12 रुपए प्रति लीटर का मूल्य गिरावट होने से राहत पा रहे उपभोक्ताओं को एकसाथ टैक्स वृद्धि का झटका सहने के लिए तैयार रहना चाहिए। सूत्रों की मानें तो पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में तो इसकी तैयारी भी कर ली गई है। वहां करीब डीजल और पेट्रोल पर सात रुपए बढ़ाए जाने हैं। संभवत: राजस्थान में मतदान होने के बाद ही यह फैसला लिया जा सके।

पेट्रोल-डीजल से हर माह सरकार को 1100 करोड़ रुपए की आय

मध्यप्रदेश में सरकार को पेट्रोल और डीजल पर वैट और एडिशनल टैक्स से हर महीने तकरीबन 1100 करोड़ रुपए की आय होती है। अक्टूबर में केंद्र के निर्देश पर सरकार ने ढाई रुपए वैट घटाया था। इधर, दोनों ही पेट्रोलियम पदार्थाें के दाम कम हुए हैं। ऐसे में नई सरकार रेवेन्यू के लिए टैक्स बढ़ा सकती है।

चुनावी गणित: तीनचार माह दाम बढ़े रहे तो आम चुनावों में दे सकेंगे राहत

मई में होने वाले आम चुनावों के कारण दाम कम नहीं होंगे यह सवाल हर उपभोक्ता के मन में है। इस संबंध में पेट्रोल पंप डीलर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह कहते हैं कि तीन राज्यों के नतीजों पर केंद्र का रुख स्पष्ट होगा। लेकिन राज्य को आय बढ़ाने के लिए टैक्स बढ़ाना होगा। नई सरकार अभी टैक्स बढ़ाती भी है तो तीन-चार माह तक राजस्व में वृद्धि होगी। इससे आम चुनाव के पहले रेट कम किए जा सकते हैं।

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