18-01-2019 01:00:am
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नई दिल्ली। पुलिस और पशुपालन अधिकारियों द्वारा 2014 से 2017 के बीच देश भर में पकड़े गए मांस का बहुत कम प्रतिशत गाय का था। इसमें ज्यादातर बैल और भैंस का मांस पाया गया था। यह हैदराबाद स्थित नेशनल रिसर्च सेंटर आॅन मीट (एनआरसीएम) द्वारा पूरे देश में प्राप्त 112 नमूनों के डीएनए विश्लेषण को टेस्ट करने के बाद कहा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इसमें केवल 8 नमूने या 7 फीसदी गाय का मांस था। बता दें कि एनआरसीएम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तहत एक प्रमुख मांस अनुसंधान संस्थान है। मांस प्रजाति की पहचान के लिए इस प्रयोगशाला ने 2014 से 2017 तक यूपी, महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक, केरल, एमपी, पंजाब, छत्तीसगढ़, गोवा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के राज्य पुलिस और पशुपालन विभागों द्वारा भेजे गए नमूनों का परीक्षण किया था। संस्थान ने वैसे तो 139 नमूने प्राप्त किए थे लेकिन केवल 112 ही डीएनए निष्कर्षण के लिए उपयुक्त थे। राज्य के अधिकारियों को संदेह था कि 69 नमूने गाय के मांस थे, 34 नमूनों में अन्य मवेशी या भैंस के मांस के रूप में वर्गीकृत करने के बारे में कोई स्पष्टता नहीं साबित हो पा रही थी। वहीं 5 भैंस के नमूने थे, 4 बैल और एक कुत्ते का मांस हो सकता था। शोधकतार्ओं ने कहा- दिलचस्प बात यह है कि गाय के होने के संदेह में 3 नमूने ऊंट के मांस के पाए गए और कुत्ते के मांस के रूप में पाया गया नमूना दरअसल भेड़ का था। शोधकर्ताओं ने 2018 में और 80 नमूने प्राप्त किए हैं जिनसे नमूनों की कुल संख्या 206 हो गई है।

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