22-11-2017 07:25:am
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ग्वालियर अमृत व स्मार्ट सिटी में अंशदान देने के लक्ष्य को लेकर भले ही नगर निगम संपत्तिकर के 75 करोड़ टारगेट वसूली में लगा हो। लेकिन चालू वित्तीय वर्ष में मात्र शेष 49 दिन में 49 करोड़ की राशि वसूलना उसके लिए टेड़ी खीर हो गया है। हालांकि हर दिन लगभग 1.5 करोड़ की राशि वसूली लक्ष्य को पूर्ति करने के लिए अब बड़े बकायादारों को टारगेट करने की योजना पर काम किया जा रहा है। ग्वालियर में विकास कार्यों के चलते 750 करोड़ के कार्य अमृत योजना व 2400 करोड़ के कार्य स्मार्ट सिटी योजना में होना है। लेकिन इसके लिए अमृत योजना में 33 प्रतिशत केंद्र, 50 प्रतिशत राज्य व 17 प्रतिशत नगरीय निकायों को हिस्सेदारी करनी है। वहीं स्मार्ट सिटी में भी पीपीपी मॉडल से काम होना है और इसी कारण नगर निगम में आर्थिक सुधार के लिए चालू अभियान के दौरान चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 (दिसंबर 2017) में 75 करोड़ का टारगेट निर्धारित किया गया है। लेकिन लक्ष्य पूर्ति के चलते अभी तक 26 करोड़ की राशि ही वसूल हो पाई है, जो वीते वित्तीय वर्ष 2016-17 में हुई वसूली से 36 लाख ज्यादा है। लेकिन नवंबर 2016 में नगर निगम को संपत्तिकर के 6 करोड़ व दिसंबर में 2.5 करोड़ की ही राशि मिली थी। ऐसे में चालू वित्तीय वर्ष में 8.5 करोड़ के लक्ष्य से ज्यादा वसूली होने पर भी नगर निगम तय 75 करोड़ के टारगेट को पाने में असफल हो जाएगा।

ऐसे बड़ी बीते वर्षोें में संपत्तिकर वसूली की राशि

वर्ष 2014-15 में नगर निगम की संपत्तिकर वसूली 17.84 करोड़ थी, जो इन्हीं संपत्तिकर वसूली अमले की मदद से एक वर्ष में 24 करोड़ ज्यादा की वसूली करने के चलते वित्तीय वर्ष 2015-16 में 41.88 करोड़ तक पहुंच गई और इसके बाद वित्तीय वर्ष 2016-17 में संपत्तिकर लगभग 50 करोड़ से ज्यादा हो गया।

बड़े बकायदारों को टारगेट करने की है तैयारी

75 करोड़ के टारगेट की पूर्ति को लेकर अब नगर निगम अमला बड़े बकाएदारों को लक्ष्य बनाने जा रहा है। जिसके चलते 24 करोड़ बकाया वाले रेलवे, 2 करोड़ वाले दुग्ध संघ, 9 करोड़ वाले एजी आॅफिस, 60 लाख वाले तानसेन होटल, 75 लाख बकाया वाली विधिचंद्र शाला जैसी संपत्तियां निशाने पर होंगी।

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