20-07-2018 09:35:pm
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भोपाल जल-नल योजना सहित सरकार की तीन योजनाओं को लेकर हुए ई-टेंडरों में अबतक की शिकायतों में दिख रहा 1 हजार करोड़ का घोटाला कई गुना बढ़ा हो सकता है। सूत्रों की मानें तो यह घोटाला मप्र के इतिहास के सबसे अबतक के सबसे बडे 1500 करोड़ के व्यापमं घोटाले को काफी पीछे छोड़ सकता है। दरअसल, अबतक महज तीन घोटालों की जांच कर रही ईओडब्ल्यू की जद में 2012 से लेकर 2018 तक के घोटाले आ सकते हैं। इसी दिशा में ईओडब्ल्यू ने ई-टेंडरिंग के शुरुआती टेंडरों को भी खंगालना शुरू कर दिया है। इसके लिए मैप आईटी विभाग से ई-टेंडरिंग के कंप्यूटर सर्वर का डेटा मंगवाया गया है। सूत्रों की मानें तो सर्वर से डेटा की फाइलें इतनी बड़ी और ज्यादा हैं कि इन्हें देने में ही मैप आईटी को मशक्कत करना पड़ रही है। मालूम हो कि एक हजार करोड़ की तीन योजनाओं के ई-टेंडरों में फर्जीवाडे को नवागत प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल द्वारा उजागर किया गया था। आईटी विभाग ने भी मामले की शिकायत ईओडब्ल्यू में की थी।

जीबी नहीं, बल्कि टीबी में है डेटा

सूत्रों की मानें तो ईओडब्ल्यू ने मैप आईटी विभाग से 2012 से लेकर अबतक हुए ई-टेंडरिंग का डेटा बेस मांगा है, जोकि मैप आईटी अपने कंप्यूटर सर्वर से निकाल कर देरहा है। सायबर जानकारों की मानें तो यह रिकॉर्ड काफी लंबा है, जोकि ई-मैल या पैन ड्राइव से नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि डेटा एमबी (मेगा बाइट) या जीबी (गेगा बाइट) में नहीं बल्कि टीबी (टेरा बाइट) में है। एक हजार एमबी का मतलब एक जीबी होता है। वहीं, एक लाख जीबी का डेटा का एक टीबी कहते हैं, जोकि काफी कर कंप्यूटर की हार्डडिस्क में ही दिया जा सकेगा।

मुख्यालय ने की थी सायबर एक्सपर्ट की मांग

ई-टेंडरिंग के सायबर अपराध को सुलझाने के लिए ईओडब्ल्यू ने पुलिस मुख्यालय से सायबर एक्सपर्ट की मांग की थी। इसको लेकर मुख्यालय ने सायबर एक्सपर्ट माने जाने वाले एआईजी प्रवीण मंडलोई को इस जांच में सहयोग करने के लिए अटैच कर दिया है। एआईजी मंडलोई इन दिनों पुलिस मुख्यालय स्थित एटीएस में एसपी मुख्याल के पद पर हैंं। पिछले दिनों ही वह विश्वशांति मिशन (यूएन मिशन) में करीब एक साल रहकर लौटे हैं।

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NEWS EXPRESS

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