20-07-2018 09:46:pm
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इंदौर  ।  जिस तरह से फिल्म ‘चक दे इंडिया’ में खिलाड़ियों के चयन को लेकर पक्षपात के दृश्य बताए गए थे, वे खिलाड़ियों की असल जिंदगी में भी सामने आते हैं। इसकी एक बानगी स्टेट लेवल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में खिलाड़ियों के चयन को लेकर सामने आई है, जहां बॉक्सिंग के लिए चयन करने वाली समिति ने 5 बार के गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ियों को न सिर्फ स्पर्धा में चयन के लिए अयोग्य घोषित कर दिया, बल्कि उनके साथ अभद्रता भी की गई। मामला इंदौर जिला शिक्षा अधिकारी के तहत चयन समिति का है। बॉक्सिंग के लिए चयन करने वाली समिति ने 5 बार के गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ियों को स्पर्धा में चयन के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। इतना ही नहीं समिति के लोगों ने उनके साथ अभद्रता भी की। अपनी इस शिकायत को लेकर सोमवार को इंदौर का नाम ‘खेलो इंडिया’ में रोशन करने वाले गोल्ड मेडलिस्ट बॉक्सर युवराज ठाकुर और अर्पिता शुक्ला परिजनों के साथ संभागायुक्त राघवेंद्र सिंह के समक्ष पहुंचे। कमिश्नर ने मामले की जांच के दिए आदेश संभागायुक्त राघवेंद्र सिंह ने खिलाड़ियों के साथ हुई उक्त घटना के मामले में जांच के आदेश दिए हैं और कहा कि खिलाड़ियों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा। खेलों में किसी भी प्रकार का पक्षपात होना नहीं चाहिए। जो उत्कृष्ट हैं, जो अच्छा खेलते हैं, उनको उस विधा में आगे लाना चाहिए। मप्र में इंदौर संभाग का खेलों को लेकर बहुत बड़ा स्थान रहा है और कई अच्छे खिलाड़ियों का चयन हमारे इंदौर संभाग से हुआ है।

स्पर्धा में प्रवेश हेतु फॉर्म नहीं किए स्वीकृत

चयन समिति के सदस्यों पर प्रताड़ित किए जाने के आरोप लगाते हुए खिलाड़ियों के परिजन ने बताया कि अपने चहेते खिलाड़ियों को स्पर्धा में प्रवेश देने के लिए चयन समिति की सदस्य माधुरी बेंजामिन और महावीर आर्य ने उनके फॉर्म स्वीकृत नहीं किए और अभद्रता कर उन्हें बाहर कर दिया। प्रतिभावान बच्चों को जानबूझकर चयन समिति द्वारा हमेशा के लिए खेल से बाहर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का बहुत ही दु:ख है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खेलो इंडिया के माध्यम से खेलों को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन वहीं एक शासकीय विभाग द्वारा खिलाड़ियों के साथ इस तरह का भेदभाव कर उन्हें खेलों से बाहर किया जा रहा है।

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NEWS EXPRESS

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