20-07-2018 09:46:pm
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भोपाल भारत सरकार की त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम के तहत मप्र को पिछले चार साल से पैसा नहीं मिलने के कारण जल संसाधन की 10 वृहद परियोजना जहां शुरू नहीं हो सकी, वहीं एनवीडीए की 11 परियोजनाएं अटकी हुई है। वैसे सिंचाई विभाग की 52 परियोजनाओं में मंद गति से काम चल रहा है। उधर केंद्रीय करों में मप्र को पहली तिमाही में 14 हजार 872 करोड़ के एवज में 13 हजार 915 करोड़ की मिले है। यानी 957 करोड़ की राशि कम मिली है। इसके अलावा नाफेड से चना, मसूर और मूंग आदि की खरीदी करने के बाद 5 हजार करोड़ की राशि अटकी हुई है। केंद्र सरकार से विभिन्न योजनाओं के अलावा केंदी्रय करों, केंद्रीय सहायता योजना, केंद्र प्रवृतित योजनाओं में मध्यप्रदेश को इस साल लगभग 90 हजार करोड़ की राशि मिलनी चाहिए, लेकिन पहली तिमाही में 23 हजार 766 करोड़ की मिल सके हैं। खासकर खाद्य सब्सिडी और एकडवांस प्रोविजनल के रूप में 3 हजार करोड़ की राशि नहीं मिली है। इसके अलावा अपेक्स बैंक के माध्यम से किसानों को बांटे जाने वाले लोन में 7 हजार करोड़ से अधिक राशि के बदले साढे चार हजार करोड़ से ही संतोष करना पड़ रहा है। जीएसटी हानि प्रतिपूर्ति के रूप में भी भरपूर राशि नहीं मिल पा रही। पूर्व में बनाए जो चुके राष्ट्ररय राजमार्गों के शहरी क्षेत्रों के आंतरिक सड़कों के निर्माण के लिए भी केंद्र सरकार से पैसा नहीं मिल पा रहा है। सीआरएफ फंड, मनरेगा,सर्वशिक्षा अभियान, मोबाइल टॉवर और इंटरनेट हाईवेज की व्यवस्था के लिए भी पैसा नहीं मिल पा रहा है।

इंदौर-भोपाल एक्सप्रेस वे का मामला अधर में

राज्य सरकार ने भोपाल से इंदौर के लिए एक एक्सप्रेस-वे बनाने का प्रस्ताव दिया है, जिस पर लगभग 5 हजार करोड़ की राशि खर्च की जानी है, इसके लिए सचिव स्तर पर सहमति तो बन गई, लेकिन केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय एवं पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिल पाई है। साथ ही केंद्र इसके लिए कितना पैसा देगी, यह मामला भी अटका हुआ है।

विदेश मंत्रालय का भवन बनेगा

भोपाल में विदेश मंत्रालय भवन प्रारंभ किया जाना है, जिससे अन्य देशों से जुडे राज्य के विभिन्न मुद्दों को डील किया जाएगा, इसकी भी मंजूरी अभी विदेश मंत्रालय में अटकी हुई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने सोमवार को मीटिंग रखी थी, जो अब मंगलवार सुबह 11 बजे से होगी।

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NEWS EXPRESS

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