20-07-2018 10:03:pm
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भोपाल उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी विभाग को तीन बार कृषि विभाग में मर्ज करने की कोशिशें नाकाम होने से विभाग का अस्तित्व तो बच गया, लेकिन अच्छे दिनों की उम्मीद अभी भी धूमिल है। विभागीय सेटअप फाइनल होने में ही सालों बीत गए तो कर्मचारियों अधिकारियों की भर्ती नहीं हो सकी। इसके बाद पदोन्नति की नौबत आई भी तो बीते दो साल से पदोन्नति में आरक्षण मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की याचिका पर यथास्थिति के आदेश होन ेसे बिना पदोन्नति ही रिटायर होने का सिलसिला चल रहा है। ऐसे में अमला तो तेजी से कम हो रहा है, लेकिन नई भर्ती और पदोन्नति नहीं होने से खाली पदों की तादाद बढ़ती जा रही है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि मौजूदा अमले पर चार से पांच गुना तक कार्यभार बढ़ चुका है।

जिस पद पर भर्ती, उसी से हो रहे हैं रिटायर

अमले की कमी से जूझ रहे उद्यानिकी विभाग में कर्मचारी संगठनों ने 2005 से अमला वृद्धि और पदों के संरचनात्मक ढांचे के सुदृढ़ीकरण की मांग बुलंद कर रखी हैं। शुरुआत में ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी के पद 1099 तथा उद्यान विकास अधिकारी के पदों की संख्या 79 थी, इसी 79 में से 10% सीधी भर्ती के थे। ऐसे में पदोन्नति वाले पद सिर्फ 69 पद ही बचे, जिससे ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी के पद से उद्यान विकास अधिकारी के पद पर पदोन्नति का अनुपात 1:15 बना रहा। नतीजे में 30 वर्ष से अधिक की सर्विस के बावजूद ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी संवर्ग पदोन्नति से वंचित रहा। अन्य संवर्गो में भी पदोन्नति की यही स्थिति है, क्योंकि जो अमला कृषि विभाग से उद्यानिकी विभाग में अन्तरित हुआ था, वह विभाग का नवीन सेटअप स्वीकृत न होने के कारण उसी पद पर कार्यरत रहते हुये सेवानिवृत्त हो रहा है। इसी से रिटायरमेंट के बाद बैकडेट से प्रमोशन की मांग हो रही है।

3600 पदों के लिए पहला संघर्ष और मिली जीत

कर्मचारी यूनियनों के अथक परिश्रम से 2008 में विभाग व्दारा नवीन सेटअप तैयार कर राज्य शासन को केबिनेट कमेटी से अनुमोदन कराने हेतु भेजा गया किन्तु चुनाव की अधिसूचना जारी होने के कारण स्वीकृत नही हो पाया। तदोपरान्त प्रस्तावित सेटअप प्रशासनिक स्तर पर कई प्रकार के संशोधन के दौर से गुजरता रहा लेकिन कर्मचारी यूनियनों के द्वारा इस लड़ाई को लगातार जारी रखने के कारण ठंडे बस्ते मे नहीं जा पाया और 2012 मे इस सेटअप को राज्य केबिनेट ने स्वीकृत कर दिया। नतीजे में इसमें 3600 पद स्वीकृत किए गए हैं।

भर्ती नियम तक के लिए आंदोलन

केबिनेट से पदों की स्वीकृति तो मिल गई लेकिन अब भर्ती नियमो मे संशोधन और समावेश कराने तक के लिए कर्मचारी नेताओं को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा फलस्वरूप वर्ष 2013 मे भर्ती नियम संशोधन हुआ और कर्मचारियों-अधिकारियों को पदोन्नति प्राप्त हो सकी । वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारियों के रिक्त पड़े लगभग 250 पदों को पदोन्नति से उद्यान विकास अधिकरियो से भरने के लिए उनकी अनुभव सीमा मे 2 वर्ष की विशेष छूट राज्य शासन की केबिनेट कमेटी द्वारा वर्ष 2015 में दी गई । इससे खाली हुए पदों पर ही भर्ती प्रक्रिया अपनाई गई।

राज्य सरकार की अपील पर स्टे के कारण अटकी पदोन्नति सूची

20 जनवरी 2016 को उद्यान विकास अधिकारियों की डीपीसी होने के बाद उच्चतम न्यायालय के स्थगन के कारण अटकी पदोन्नति सूची के परिप्रेक्ष्य में कर्मचारी नेताओं का प्रयास है कि पदोन्नति के पात्र होते हुए भी पदोन्नति से वंचित सेवानिवृत्त हो चुके लोकसेवकों को भी डीपीसी दिनांक से ही पदोन्नति का लाभ प्राप्त हो।

बजट के साथ बढ़ी जिम्मेदारी

1982 में उद्यानिकी विभाग का अलग विभागाध्यक्ष कार्यालय बनने के बाद प्रारंभिक वार्षिक बजट 11 करोड रूपए से बढकर 2012-13 मे 300 करोड़ हो गया था, जो अन्य केन्द्रीय योजनाओं के भाग को मिलाकर अब रूपए 500 करोड के लगभग हो गया है। विभाग का भौतिक लक्ष्य 3.50 लाख हेक्टेयर से बढकर 20 लाख हेक्टेयर हो चुका है। अनेक महत्वाकांक्षी योजनाओं का भी इतने ही सेटअप में सुचारू रूप से क्रियान्वयन हो रहा है।

विभाग बनने के समय से ही जूझ रहा अमले की कमी से

कृषि विभाग से 1982 मे अलग होकर बने उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी विभाग को वापिस कृषि विभाग मे मर्ज करने हेतु वर्ष 1990 और 2003 के बाद 2009 में काफी प्रयास हुए, लेकिन विभाग के उद्यानिकी विशेषज्ञता धारित करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने संघर्ष से विभाग को कृषि विभाग में मर्ज नही होने दिया तथा। नतीजे में उद्यानिकी विभाग आज तक अलग पहचान बनाए हुए है । 1982 में उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी विभाग के अमले की तत्समय संख्या 4673 थी। युक्तियुक्तकरण की नीति के तहत वर्ष 2000 मे 30 प्रतिशत कटौती और छत्तीसगढ गठन के बाद पश्चातवर्ती मध्यप्रदेश में अमले की संख्या मात्र 3120 रह गई । अपने गठन के बाद अमले में बढ़ोत्तरी के बजाय कमी झेलने वाला यह प्रदेश का इकलौता विभाग है जबकि कार्यभार कई गुना बढा है। द्यानिकी विशेषज्ञता वाला होने के कारण विभागीय तकनीकी अमले पर काम का काफी बढ़ा तथा निचले स्तर पर मैदानी अमले का पदोन्नति से वंचित होना लगातार जारी है।

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NEWS EXPRESS

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