20-07-2018 09:31:pm
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भोपाल। भारत में हर साल तंबाकू से 10 लाख मौतें होती हैं, जिनमें से 91 हजार मध्यप्रदेश से हैं। इसका बड़ा कारण धूम्रपान है, जिसके लिए ईसि गरेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसी के मद्देनजर एनसीएचएसई एवं कंज्यूमर वॉइस ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखते ईसि गरेट पर तत्काल कड़ाई से प्रतिबंध लगाने की मांग की है। दरअसल ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे, 2010 अनुसार भारत में तंबाकू सेवन से प्रति वर्ष 10 लाख होने वाली मौतों में मध्य प्रदेश के 91 हजार लोग शामिल है। इसी के मद्देनजर एनसीएचएसई एवं कंज्यूमर वॉइस संयुक्त रुप से तंबाकू नियंत्रण के लिए जागरुकता अभियान चला रहे हैं। एनसीएचएसई ने भारत सरकार द्वारा पारित अधिनियम (2003) के तहत मप्र में तंबाकू विक्रय प्रक्रिया पर उचित व्यवस्था लागू करने हेतु मप्र शासन से अनुरोध किया है। इसी कड़ी में अब मप्र में ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लागू करवाना है, जिसमें हानिकारक तरल पदार्थ निकोटिन होता है। निकोटिन, ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट, 1940 (पूरे भारत में लागू) के अंतर्गत एक जहरीला पदार्थ है। निकोटीन अत्यधिक नशे की लत के अलावा गंभीर साइड इफेक्ट्स के लिए जाना जाता है। यह दिल, प्रजनन प्रणाली, फेफड़े, गुर्दे आदि पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। कई अध्ययनों ने इसकी कैंसरजन्य क्षमता की ओर इशारा किया है, जबकि कुछ अध्ययनों के अनुसार ई-सिगरेट का उपयोग डीएनए उत्परिवर्तन, कैंसर, हृदय रोग और अस्थमा का कारण बन सकता है।

छिपाई जाती है ई-सिगरेट की घातक सच्चाई

तंबाकू उद्योग द्वारा ई-सिगरेट को तंबाकू के विकल्प के रुप मे प्रचारित किया जा रहा है, जिसमे युवाओं को किशोरावस्था के लिए गेटवे के रुप में ई-सिगरेट धूम्रपान शुरु करने के लिए आकर्षित किया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (ई-सिगरेट, ई-सिग) एक बैटरी संचालित वाष्पकारक है, जो धूम्रपान का अनुभव देता है, लेकिन इसमें तम्बाकू नहीं होता। उपयोगकर्ता एक वाष्पकारक के भीतर तरल पदार्थ को गर्म करके वाष्प पैदा करता है। इस तरल पदार्थ में निकोटीन और अन्य रसायन होते हैं। गर्म तरल जल्द ही वाष्प (एयरोसोल) में बदल जाता है जिसका श्वास के माध्यम से व्यक्ति सेवन करता है। इन ईसि गरेट को इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ईएनडीएस) भी कहा जाता है।

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