20-07-2018 10:12:pm
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भोपाल। सातवें वेतनमान के हिसाब से पेंशन रिवाइज होने की उम्मीद लगाए बैठे प्रदेश केचार लाख पेंशनर्स का डेढ़ साल का इंतजार अब एक महीने और बढ़ गया है। दरअसल, प्रदेश सरकार ने मई में पेंशनर्स को सातवें वेतनमान का लाभ देने का निर्णय तो ले लिया था, लेकिन बैंकों का कहना है कि इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए। तकनीकी कारणों की वजह से बैंक यह बढ़ी पेंशन नहीं दे पा रहे हैं। गफलत का खुलासा तब हुआ जब पेंशनर्स ने इस माह अपनी पेंशन देखी। चूंकि सरकार ने 15 मई को इस संबंध में घोषणा की थी, इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि जुलाई में तो बढ़ी पेंशन मिल ही जाएगी। पूछने पर बताया गया कि बैंकों ने सरकार से इस बारे में कुछ स्पष्टीकरण मांगा है। नाम न छापने की शर्त पर एक बैंक अधिकारी ने कहा कि जब तक सरकार से स्पष्ट निर्देश नहीं मिलेंगे, बैंक बढ़ी हुई पेंशन कैसे दे देंगे? सूत्रों के अनुसार कुछ बैंकों ने तो बाकायदा प्रदेश सरकार को इस बारे में पत्र लिखकर स्थिति को स्पष्ट करने की गुजारिश की है।

3000 से 30000 रुपए तक बढ़ी है पेंशन

चुनावी वर्ष में किसानों, कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मजदूरों को कई सौगातें देने के बाद शिवराज सरकार ने मई में पेंशनर्स को सातवें वेतनमान का लाभ देने का निर्णय लिया था। इस निर्णय से पेंशनर्स की मासिक पेंशन साढ़े 3 हजार रुपए से 30 हजार प्रतिमाह तक बढ़ गई है। प्रदेश के पेंशनर्स को सरकार ने 1 अप्रैल 2018 से सातवें वेतनमान का लाभ तो दिया है, लेकिन जनवरी 2016 से मार्च 2018 तक का एरियर नहीं दिया है। इससे पेंशनर्स नाराज हैं। अब बढ़ी हुई पेंशन नहीं मिलने से उनकी चिंताएं और बढ़ गई हैं।

पहले इसलिए हुई थी देरी

बजट में वित्त मंत्री जयंत मलैया ने प्रदेश के चार लाख पेंशनर्स को सातवें वेतनमान में सिर्फ 10% का फायदा दिया था। इसे लेकर भी पेंशनर्स नाराज थे। इसी के चलते मप्र के रिटायर्ड कर्मचारी लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि पेंशनर्स की नाराजगी के चलते राज्य सरकार ने अपने निर्णय में परिवर्तन किया, क्योंकि चुनावी वर्ष में वह नाराजगी मोल लेकर कोई रिस्क नहीं उठाना चाहती।

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NEWS EXPRESS

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