22-07-2018 08:22:pm
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जबलपुर। शहर से लगे औद्योगिक क्षेत्र महंगी बिजली के साथ बार-बार लाइट गोल होने से परेशान हैं। प्रतिदिन 24 घंटे में 3 से 4 घंटे बिजली गोल रहती है। इस वजह से छोटे और मझोले उद्योगों पर बिजली की मार पड़ रही है और उद्योगपतियों को लाखों का नुकसान हो रहा है। गौरतलब है कि जिलें में संचालित उद्योगों को शासन द्वारा 8 रुपए प्रति यूनिट के मान से बिजली उपलब्ध करवाई जा रही है। इसके बावजूद इन इकाइयों को पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है। उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि एक ओर विद्युत अमला अन्य राज्यों को सस्ती दर पर बिजली बेच रहा है जबकि शहर से लगे औद्योगिक क्षेत्र बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे हो रहे प्रभावित बिजली संकट के कारण विभिन्न उद्योग इसलिए लड़खड़ा रहे हैं क्योंकि इन इकाइयों के अधिकांश उपकरण व मशीनें एक बार स्टार्ट होने के बाद कई मिनटों का वक्त लेती हैं। इसके बाद कई घंटों तक ये लगातार चलकर उत्पादन करती हैं। यदि इस बीच बिजली गोल हो जाए तो उन्हें दुबारा स्आर्ट करने के लिए फिर इंतजार करना पड़ता हैं। यहीं वजह है कि मशीनें पर्याप्त उत्पादन नहीं दे पाती हैं जबकि श्रमिक और उत्पादन की लागत पर कोई कटौती नहीं होती। 3 साल में नहीं बना सब स्टेशन औद्योगिक क्षेत्र मनेरी में 35 केवीए का सब स्टेशन बनाया जाना है। यह काम 3 साल से पेंडिंग पड़ा है। यहीं वजह है कि मनेरी में हमेशा बिजली संकट रहता है। जून माह में औसतन प्रतिदिन 3 से 4 घंटे बिजली बंद रही।

ग्रामीण भी जुड़े फीडर से

बताया जाता है कि औद्योगिक क्षेत्र मनेरी में 11 केवीए की लाइन डली है। जबकि यहां 33 केवीए की लाइन की जरूरत है। ऐसे में शार्ट सर्किट या अन्य कारणों से गांव की लाइट बंद होने पर औद्योगिक इकाई भी अंधकार में डूब जाती है। उद्योगपतियों का कहना है कि यहां उद्योगों के लिए 33 केवीए लाइन अलग से डाली जाना चाहिए।

लाइनमेनों की कमी

औद्योगिक क्षेत्र उमरिया-डुंगरिया के भी यहीं हालत हैं। प्रमुख कमी लाइनमेनों की है। मात्र 2 लाइनमेन साइकल पर सीढ़ी लेकर आते हैं और घंटों तक फाल्ट सुधारने में लग जाता है। यदि क्षेत्र में विद्युत रखरखाव के लिए वाहन उपलब्ध हो तो शिकायत जल्दी निपट सकती है। हालांकि औद्योगिक क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट की स्थिति संतोषजनक है और सड़कों में भी सुधार हो गया है।

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