20-08-2018 12:11:pm
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नई दिल्ली। बुधवार से शुरू हुए संसद का मानसून सत्र के लिए भाजपा और कांग्रेस एक- दूसरे को डील की पेशकश करती रही हैं ताकि संसद की कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके और कुछ कार्य हो सके। सरकार की योजना 15 बिल पारित कराने की है। हालांकि विपक्ष के आक्रामक रवैये के कारण चुनौतियां भी हैं। मंगलवार को कांग्रेस के दμतर में विपक्षी दलों की बैठक हुई, जिसमें सरकार को घेरने की तैयारी की गई। इसमें अविश्वास प्रस्ताव पर 12 दलों ने सहमति भी जताई। 

आप इसके लिए भुगतान करते हैं

संसद सत्र के हर एक मिनट के लिए आपको 2.5 लाख रुपये अदा करने पड़ते हैं (जो कि 2012 में था, अब इसकी लागत बहुत ज्यादा है)। अब इसकी लागत है 1.5 करोड़ रुपये प्रति घंटे और 9 करोड़ रुपये प्रति दिन है (अगर एक दिन में 6 घंटे का कार्य करना माना जाए)। सत्र के हंगाने की भेंट चढ़ जाने का मतलब है कि आपका पैसा नाली में बह गया। सदन के हंगामे में बर्बाद हो जाती है आपकी गाढ़ी कमाई?आपका पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता है, संसद में बर्बाद हुए समय के लिए भी आप पैसे अदा करते हैं। 

कार्य

68 लंबित विधेयक, जिनमें से 25 को विचार के लिए सूचीबद्ध किया गया है और 3 वापसी के लिए सूचीबद्ध हैं। 18 नए विधेयक लाए जाने के लिए सूचीबद्ध हैं। सत्र के दौरान ही राज्यसभा में उपसभापति का चुनाव होगा। पीजे कुरियन का कार्यकाल पूरा हो रहा है। 

राजनीति

रास चुनाव में (2019 के लोस चुनाव से पहले) विपक्षी दलों की एकता की परीक्षा होगी। मॉब लिंचिंग, सांप्रदायिक हिंसा, ईंधन की कीमतें, किसानों का संकट, जम्मू-कश्मीर, बैंक धोखाधड़ी व टीडीपी द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पर तीखी बहस की उम्मीद करें। 

हकीकत

इस साल का आखिरी सत्र साल 2000 से लेकर अब तक का सबसे कम उपयोगी सत्र था, जिसमें संसद के विधायी कार्यों पर लोकसभा में 1% समय और राज्यसभा में 6% समय खर्च किया गया। सरकार ने इस सत्र के लिए 15 बिलों को सूचीबद्ध किया है। 

मानसून सत्र की स्थिति

18 जुलाई से 10 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र में 6 दिन छुट्टी के हैं। इसलिए कुल मिलाकर सदन की कार्यवाही के लिए हैं 18 बैठक यानी 198 घंटे ही होंगे। संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में 68 विधेयक अटके पड़े हैं। इनमें तीन तलाक पर रोक लगाने के लिए मुस्लिम विवाह संरक्षण बिल, मासूमों से रेप पर फांसी के लिए आपराधिक कानून संशोधन बिल, ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने वाला बिल, भगोड़ा कानून मोदी सरकार की पहली प्राथमिकता की सूची में सबसे ऊपर शामिल हैं। इसके अलावा संसद के इस सत्र में मानवाधिकार, सूचना का अधिकार और मानव तस्करी पर गंभीर बहस भी देखने-सुनने को मिलेगी। 

पहले भी हुआ है हंगामा

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