20-08-2018 12:12:pm
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भोपाल भारत के महान गीतकार एक दिन पहले हम सब को छोड़कर परम सत्ता की अनूठी दुनिया में गीत गुनाने की यात्रा पर निकल गए। लेकिन उनके साथ वह टीस भी गई कि भारत रत्न का मेडल उनके सीने पर नहीं चमक सका। करोड़ों दिलों पर राज करने वाले गीतकार का मानना था कि उन्होंने हिंदी की इतनी सेवा तो की है कि भारत रत्न मिल सके। यह इच्छा उन्होंने तब जाहिर की थी तब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न से नवाजा गया था। उस दौरान जब उन्हें भारत रत्न दिए जाने वाले अभियान के बारे में बात की तो उन्होंने साफगोई से कहा कि, ‘मैंने हिंदी की बहुत सेवा की है। न केवल इस भाषा को भारत में बल्कि विदेशों में भी प्रचारित किया है। देखिए, मैं इस सम्मान का दावेदार तो हूं परंतु भारत रत्न देना या न देना सरकार के हाथ में है।’ एक बार फिर नीरज के पक्ष में माहौल बनने की वजह थी अटल बिहारी बाजपेयी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना। नीरज और अटलजी कई मंचों पर साथ कविता पाठ किया था। खास बात यह है कि दोनों ने आजादी के पहले कानपुर के डीएवी डिग्री कॉलेज में वकालत की तालीम लेने के दौरान कई साल साथ साथ रहे। हालांकि अटलजी उनसे सीनियर थे।

अटल पहले कवि, बाद में राजनेता : देश के सर्वश्रेष्ठ गीतकार गोपालदास नीरज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न दिए जाने से बेहद खुश थे। अटलजी के साथ कवि सम्मेलन में मंच साझा करने वाले नीरज ने कहा था कि वे (अटल ) कवि पहले और राजनेता बाद में हैं। हालांकि उन्हें इस बात का मलाल है कि अटलजी को भारत रत्न देरी से दिया गया।

‘नीरज’ के पेंशन को लेकर सरकार पर बोला हमला

देश के जाने-माने साहित्यकार एवं कवि गोपाल दास नीरज के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि नीरज जी अपनी पेंशन को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिले थे। जिस सरकार ने उन्हें जीते-जी पेंशन नहीं दिया, वही सरकार उनके निधन के बाद उनके नाम का पुरस्कार देने की घोषणा कर रही है। उन्होंने कहा कि साहित्यकार को अपमानित करने वाली सरकार के हाथों कौन साहित्यकार पुरस्कार लेगा।

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