20-08-2018 07:53:pm
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चेन्नई। पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे कलाईनार के नाम से मशहूर एम करुणानिधि का मंगलवार शाम निधन हो गया। वह 94 वर्ष के थे। 27 जुलाई को देर रात अचानक तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें चेन्नई के कावेरी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके लिए अस्पताल में स्पेशल आईसीयू सेटअप किया गया था। सोमवार शाम डॉक्टरों ने मेडिकल बुलेटिन जारी कर बताया था कि अगले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होंगे। मंगलवार सुबह से उनके शरीर पर दवाओं का असर बंद हो गया था। करुणानिधि भारतीय राजनीति के पहले ऐसा नेता हैं जिन्होंने किसी पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर 50 साल तक काम किया। 27 जुलाई 1969 को उन्होंने डीएमके पार्टी अध्यक्ष का पद संभाला था। करुणानिधि की मौत तमिल राजनीति के लिए दो साल के अंतराल में दूसरा बड़ा झटका है। 5 दिसंबर 2016 को एआईडीएमके प्रमुख जे जयाललिता का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था।

10 फरवरी 1969 में पहली बार बने सीएम

3 जून 1924 को जन्मे करुणानिधि पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 10 फरवरी 1969 को पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वह तमिलनाडु की सत्ता पर सबसे ज्यादा समय तक काबिज रहने वाले मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने 6,863 दिन तक मुख्यमंत्री का पद संभाला। 60 साल के राजनीतिक करियर में वे हर चुनाव में अपनी सीट जीते।

अन्नादुरई की मौत के बाद बने थे पार्टी के नेता

डीएमके के संस्थापक सीएन अन्नादुरई की मौत के बाद करुणानिधि पार्टी के नेता बने। इसके बाद से साल 2011 तक वह पांच बार (1969-71, 1971- 76, 1989-91, 1996-2001 और 2006-2011) राज्य के मुख्यमंत्री रहे। 27 जुलाई 1969 में डीएमके अध्यक्ष का पद संभाला था। इससे पहले उन्हें विधायक दल का नेता चुना गया था।

फिल्मों में की स्क्रिप्ट राइटिंग, इसे ही बनाया राजनीति का जरिया

तमिल फिल्म जगत में स्क्रिप्ट राइटर के रूप में करुनानिधि ने अपने करियर की शुरुआत की थी। वे द्रविड़ आंदोलन से जुड़े थे। अपने ज्ञान और भाषण देने की कला में माहिर होने की वजह से वो बहुत जल्दी एक कुशल राजनेता बन गए। करुणानिधि समाजवादी आदर्शों को बढ़ावा देने वाली ऐतिहासिक और सामाजिक कहानियां लिखने के लिए मशहूर थे। राजनीति में अपनी जगह बनाने के लिए उन्होंने तमिल सिनेमा बेहतरीन इस्तेमाल किया। उन्होंने पराशक्ति नामक फिल्म के माध्यम से अपने राजनीतिक विचारों का लोगों के बीच प्रचार करना शुरू किया। यह फिल्म तमिल सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इसमें द्रविड़ आंदोलन की विचारधारा का समर्थन किया गया था। शुरूआत में इस फिल्म पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था लेकिन साल 1952 में इसे रिलीज कर दिया गया। यह फिल्म बॉक्स आॅफिस में बड़ी हिट साबित हुई।

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