20-08-2018 12:08:pm
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इंदौर ।   जिस प्रकार हमारा साफ-सुथरा व चमकदार चेहरा हमारे व्यक्तित्व को दर्शाता है, उसी प्रकार हमारी भाषा या बोल भी हमारे व्यक्तित्व की पहचान बनते हैं, क्योंकि आपकी भाषा ही आपके व्यक्तित्व को निखारती है, इसलिए व्यक्ति को शरीर व चेहरे की तरह ही अपनी भाषा को भी संवारिए तो आपका व्यक्तित्व अपने आप संवर जाएगा। यह बात गुरुवार को महावीर बाग में गच्छाधिपति जिनमणि प्रभ सूरीश्वर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। हमारा व्यवहार भाषा पर निर्भर उन्होंने कहा कि हमारी बोलचाल या भाषा में शब्दों का मूल्य होता है। हमारा सारा व्यवहार हमारी भाषा पर निर्भर करता है। हमारे घर में हम कैसा वातावरण बनाना है, यह भी हमारी भाषा पर निर्भर होता है। अगर हम बोलने से पहले सोचते हंै तो उसके चेहरे पर अलग ही चमक होती है, इसीलिए कोई भी बात बोलने से पहले उसके परिणाम पर विचार करना जरूरी होता है।

महाभारत की परिणति है भाषा

महाराजश्री ने कहा कि अनंत पुण्य की वजह से हमें भाषा की शक्ति मिली है। शब्द वही है, हम चाहें तो इससे गीत बना सकते हैं और चाहे तो गाली भी। शब्द हृदय में घाव करते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण महाभारत ही है। शब्दों की परिणति ही महाभारत का कारण बनी, वहीं दूसरी तरफ शांति का परिणाम प्राप्त करने के लिए भी भाषा ही प्रमुख होती है। हमारा चेहरा हमारे व्यक्तित्व की पहचान होता है और उसके मामले में हम सजग भी रहते हंै। उसी प्रकार आपकी भाषा भी आपके व्यक्तित्व को निखारती है, इसलिए चेहरे व शरीर की तरह ही अपनी भाषा को भी संवारिए। जिसकी भाषा संवर जाएगी, उसका व्यक्तित्व भी अपने आप संवर जाएगा।

ताकतवर होते हैं शब्द

उन्होंने बताया कि भय या शब्दों से ही पता चल जाता है कि कौन राजा, कौन सेनापति और कौन सैनिक है। हमारे अपने शब्द ही हमारी केटेगरी उजागर करते हैं। इस संबंध में एक वाकये के उदाहरण से उन्होंने समझाया। महाराज ने आगे कहा कि विपरीत परिस्थितियों में अपने शब्दों, विवेक, आवेग को नियंत्रित करने वाले का ही व्यक्तित्व निखरता है। हम चाहें तो वाणी को वाणी भी बना सकते हैं और बाण भी बना सकते हैं... यह हमारी सोच पर निर्भर रहता है।

मुंह पत्ती यानि स्पीड ब्रेकर

जैन समाज में बोलते समय मुंह पत्ती का उपयोग किया जाता है। इसका मतलब होता है रुको यानि मुंह पत्ती स्पीड ब्रेकर का काम करती है। इसका प्रावधान सभी जैन धर्म अनुयायियों के लिए जरूरी माना गया है। यह मर्यादा की विवेचना का संकेत देती है। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ श्रीसंघ एवं चातुर्मास समिति के प्रचार सचिव संजय छांजेड़ एवं चातुर्मास समिति संयोजक छगनराज हुंडिया एवं डूंगरचंद हुंडिया ने जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार को हमारा समाज ओसवाल समाज अतीत, वर्तमान और भविष्य विषय पर प्रवचन होंगे।

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