20-08-2018 12:09:pm
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सांवेर।    स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर दो वर्ष पूर्व प्रसूति केन्द्र शुरू करने के आदेश दिए गए थे। सांवेर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के अंतर्गत आने वाले पांच प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों शिप्रा, डकाच्या, चन्द्रावतीगंज, पालिया और कुड़ाना में से चार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर तो प्रसूति केन्द्र शुरू हो गए हैं, लेकिन कुड़ाना में अभी तक भी प्रसूति केन्द्र शुरू नहीं हो पाया है। कुड़ाना प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के अंतर्गत 34 गांव आते हैं, जिसमें से कुड़ाना, गुरान, दर्जी कराड़िया, सुराखेड़ी, जामोदी, सिमरोल, महाराजगंजखेड़ा, कदवा, पटवा, टोड़ी, हतुनिया, सिमरोल, खाण्डाखेड़ी आदि मुख्य गांव हैं, जो इस स्वास्थ्य केन्द्र की लापरवाही और बदइंतजामी के कारण सुविधाओं से वंचित हैं। शासन द्वारा प्रसूति केन्द्र को शुरू करने के लिए दो वर्ष पूर्व ही प्रसव संबंधित सभी सुविधाएं मुहैया करवाकर शीघ्र प्रसूति केन्द्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अधिकारियों द्वारा पूरी तरह से शासन की मंशा को चौपट कर दिया। दो वर्षों बाद भी प्रसूति केन्द्र शुरू नही होने के कारण इन गांवों की महिलाओं को प्रसव के लिए 10-12 कि.मी. दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सांवेर लेकर आना पड़ता है। खास बात यह है कि दो सालों में भी अधिकारियों द्वारा इसकी सुध नहीं ली गई। कुछ घंटों के लिए खुलता है हॉस्पिटल- कुड़ाना के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर डॉ. जितेन्द्रसिंह रापजूत और डॉ. मंसूरी और एक स्टाफ नर्स गीता मेहरा पदस्थ हैं, जो कि वर्षों से सांवेर में अपनी सेवाएं दे रही हैं। हालांकि, सांवेर में भी इनकी ड्यूटी रोज नहीं रहती है। इस संस्था में प्रसूति केन्द्र प्रारंभ होने से लगभग 15-20 गांवों की आबादी को लाभ होगा तथा उन्हें स्वास्थ्य सेवाएं मिलने में देरी नहीं होगी। कुड़ाना प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर वर्तमान में दो डॉक्टर होने के बावजूद हॉस्पिटल मात्र सुबह ही खुलता है, सायंकालीन ओपीडी नहीं लगाई जाती है, जिसके कारण मरीजों को यदि सिर दर्द, बुखार की गोली भी लेना हो तो इसके उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सांवेर पर आना पड़ता है।

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