22-11-2017 07:28:am
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ग्वालियर। जेएएच प्रबंधन द्वारा पिछले दिनों अस्पताल के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान की दूरी तय करने के लिए ई रिक्शा की व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की गई थी, ताकि मरीजों को यहां से वहां लाने-ले जाने में अटेंडरों को दिक्कत का सामना न करना पड़े, कुछ रोज एक-दो ई रिक्शा यहां दिखाई दिए थे, लेकिन अब मरीज परेशान हैं, उधर शवों को पीएम हाउस तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस वाले दो से ढाई सौ रुपए तक वसूले जा रहे हैं। जबकि इसका जिम्मा अस्पताल कर्मचारियों का होता है। उल्लेखनीय है कि जयारोग्य अस्पताल काफी लंबे क्षेत्र में फैला हुआ है और ओपीडी से विभिन्न वार्डों तक मरीजों को ले जाने के लिए लंबा मार्ग तय करना पड़ता है, ऐसे में यहां चलनेवाले आॅटो इनसे मोटी रकम तो वसूलते ही है, साथ ही इससे अस्पताल परिसर में इनके धुंए से प्रदूषण फैलता है जो कि मरीजों के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है। इसी विसंगति को समाप्त करने के लिए यह तय हुआ था कि अस्पताल में कुछ ई-रिक्शा को चलाने की अनुमति दी जाएगी, जो तय की राशि पर मरीजों और अटेंडरों को अस्पताल के भीतर एक से दूसरे स्थान पर पहुंचाएंगे, वहीं इनसे प्रदूषण भी नहीं होगा, लेकिन अन्य अच्छी योजनाओं की तरह ही यह योजना भी यहां धराशाई हो गई और मरीजों के सामने फिर वहीं संकट है।

प्रायवेट एंबुलेंस वाले ऐसे कर रहे कमाई

यहां मरीज की मौत के साथ ही कर्मचारी सक्रिय हो जाते हैं, चूंकि इन हालात में अटेंडर गमजदा होते हैं ऐसे में उन्हें बहला फुसलाकर अस्पताल स्टाफ इस बात के लिए राजी कर लेता है कि पोस्टमार्टम हाउस तक शव को ले जाने के लिए वह एंबुलेंस का बंदोबस्त करवा देंगे, यही नहीं तुरंत ही वह यह सुविधा दिलवा भी देते हैं। न्यूरोसर्जरी से पीएम हाउस का फासला बमुश्किल कुछ कदम का है, लेकिन शव को यहां तक पहुंचाने के लिए 200 से 250 रुपए तक वसूले जा रहे हैं, जिसमें इन कर्मचारियों का भी हिस्सा होता है।

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