22-07-2018 08:29:pm
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भोपाल रिश्तों में बातचीत बंद हो जाए तो वक्त से पहले इंसान को बूढ़ा, बीमार और मरणावस्था तक पहुंच जाता है। कुछ इन्हीं बातों पर आधारित एकल नाटक ‘लाइफ आॅफ फोन’ का मंचन रविवार को शहीद भवन में किया गया। नाटक मध्यप्रदेश संस्कृति संचालनालय के सहयोह से सगुन सागर गुंचा नटरंग कल्चर एवं वेलफेयर सोसायटी की ओर से प्रस्तुति किया गया। इस मोनो प्ले में रीता वर्मा ने अभिनय किया। भोपाल की निर्देशक बिशना चौहान ने भी इस विषय को छुआ और मर्मस्पर्शी नाटक लिखा।

रूह कांप गई मेरी तब लिखी कहानी...

बिशना कहती हैं, एक घंटे दस मिनट के इस नाटक की कहानी सत्य घटना पर आधारित है। लगभग 8 माह पहले मैं दोपहर में एक टीवी चैनल में एक न्यूज देख रही थी कि एक स्थान में एक बूढ़ी महिला अपने फ्लैट में पूरी तरह गलकर कंकाल बन गई। उस औरत का बेटा विदेश में रहता था जिसने चार माह में अपनी मां से बात तक नहीं की। यह खबर देख-सुन देख मेरी रूह कांप गई और मन में सवाल आया कि उस मां ने कितना इंतजार किया होगा अपने बेटे के फोन का। तभी मैंने इस पर कहानी और नाटक लिखने का प्रयास किया।

दस दिनों में चार बार रीराइट की कहानी...

नाटक की कहानी एक माह में लिखी गई पहले के दस दिनों में तो चार बार कहानी को रीराइट किया। नाटक को लिखने से पहले मैंने उस महिला की पूरी जानकारी हासिल की तो मैंने यह पाया कि वह महिला चार माह से अपने घर से बाहर नहीं निकली और। यह नाटक की पहली प्रस्तुति है। मैंने नाटक में रिकॉर्डेड गीतों का भी उपयोग किया और स्टेज पर ड्रांइंग रूम को भी दर्शाया है। मंच पर कौशल्या का किरदार रीता वर्मा ने, राम का किरदार सुनील गायकबाड़ ने और आवाज रंगकर्मी राजीव वर्मा ने दी। इसी तरह मंच परे प्रकाश परिकल्पना लोकेंद्र प्रताप सिंह की, संगीत श्रुति धर्मेश की और वस्त्र परिकल्पना सरोज शर्मा की रही। नाटक मध्यप्रदेश संस्कृति संचालनालय के सहयोह से सगुन सागर गुंचा नटरंग कल्चर एवं वेलफेयर सोसायटी की ओर से प्रस्तुति किया गया।

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