20-07-2018 09:36:pm
घाटी में जाकिर के पीस टीवी समेत 30 चैनल बैन  || मोटे अफसरों को दिया फिटनेस प्रमाण पत्र, तो डॉक्टरों पर हो सकती है कार्रवाई || मिग क्रैश होने से पहले आबादी से दूर ले गए पायलट, मौत  || सिंगर हंसराज हंस बने आध्यात्मिक गुरू || सार्वजनिक स्थलों पर मिले स्तनपान सुविधा : हाईकोर्ट || स्मार्टफोन से बढ़ सकता है एडीएचडी का खतरा || त्यागी समेत 34 के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल  || बृहस्पति के 10 नए ‘चंद्रमा’ खोजे गए || मोदी सरकार के खिलाफ चार साल में पहली बार अविश्वास || तुर्की में 24 माह बाद खत्म हुआ आपातकाल || भारतवंशी सालाना 100 करोड़ डॉलर करते हैं दान || रणजी में उतरेंगी बिहार सहित नौ नई टीमें  || पाकिस्तान की एकतरफा जीत  || हंगामे से हर घंटे 1.5करोड़ रु. की चपत || जजों की रिटायरमेंट उम्र 2 साल बढ़ा सकती है सरकार  || 20 मील पैदल चलकर पहुंचा आॅफिस, बॉस ने गिफ्ट की कार ||

नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप केस में चार दोषियों में से तीन की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को फैसला आ गया। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों दोषियों मुकेश सिंह, पवन गुप्ता और विनय शर्मा की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए उनकी सजा-ए-मौत को बरकरार रखा है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने कहा कि दोषी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में कोई भी त्रुटि सामने रखने में विफल रहे हैं। अब 5 मई 2017 के फैसले पर पुनर्विचार का कोई आधार नहीं बनता। चौथे मुजरिम अक्षय सिंह ने पुनर्विचार के लिए याचिका दायर नहीं की थी। फैसला सुनाए जाने के समय निर्भया के परिजन न्यायालय में मौजूद थे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने चार मई को तीनों की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इन दोषियों के पास क्यूरेटिव पिटीशन और फिर राष्ट्रपति के पास दया याचिका का विकल्प ही बचता है।

जघन्य घटना से लेकर फांसी की सजा के फैसले तक : एक नजर

सजा के फैसले तक : एक नजर 16 दिसंबर 2012 की रात 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा निर्भया (परिवर्तित नाम) के साथ 6 लोगों ने चलती बस में गैंगरेप किया। दरिंदगी के चलते निर्भया की मौत हो गई थी। 12 सितंबर 2013 को निचली अदालत ने चार दोषियों को मौत की सजा सुनाई। एक आरोपी रामसिंह ने 11 मार्च 2013 को तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी। छठा आरोपी एक नाबालिग था। 13 मार्च 2014 को दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले की पुष्टि कर दी। इसके बाद दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थीं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई 2017 को अक्षय मुकेश फैसला सुनाया था।

इतने वर्षों में कुछ नहीं बदला, न्याय में देरी कानून का डर खत्म कर देती है

 

इतना घिनौना अपराध हुआ, हमारी बच्ची मर गई। मामला शीशे की तरह साफ है, फिर भी इसमें इतने साल लग गए। आगे कितने साल और लगेंगे, हम नहीं जानते। इसमें बड़ी नाकामी हमारी न्याय व्यवस्था की है। आप भले ही हजार कानून बना लें, लेकिन अगर न्याय में इतनी ही देरी लगेगी तो कोई फायदा नहीं। निर्भया का मामला साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया था, लेकिन आज तक सुप्रीम कोर्ट के ही चक्कर काट रहा है। न्याय में मिलने वाली यही देरी इस तरह की घिनौनी घटनाओं को करने वालों के दिल से कानून का डर खत्म कर देती है। जब तक मुजरिमों को एक निर्धारित समय में सजा नहीं सुनाई जाएगी, तब तक इन घटनाओं को नहीं रोका जा सकता।

निर्भया केस के बाद कानून में हुए ये बड़े बदलाव

peoplessamachar
NEWS EXPRESS

0

 
टीले पर फंसा परिवार, सेना का हेलिकॉप्टर भी मदद में नाकाम  || केरवा कोठी पर सुनवाई आज, अजय सिंह पर मां ने लगाए थे आरोप  || 3 साल की योजना से केंद्र ने 1 साल में हाथ खींचे  || प्रदर्शन कर शिक्षको ने जताई नाराजगी || शिवराज को आशीर्वाद मांगने का कोई हक नहीं || मंत्री पवैया के लोकार्पण करने के 37 दिन बाद भी आवासों का आवंटन नहीं || एमएससी बॉटनी की मार्कशीट दो साल बाद भी नहीं आर्इं || मप्र को भी अब बड़े पैमाने पर मिल रहे हैं मैडल: यशोधरा || 20 से ट्रांसपोर्टर्स की स्ट्राइक, सब्जी, किराने की होगी किल्लत || एटीएम से बैटरी व एसी चुराने वाले गिरफ्तार || बैंक में चली गोली, गनमैन व गार्ड घायल || फरार भू-माफिया शेख इस्माइल गिरफ्तार || व्यापारी के साथ सरेराह एक लाख रुपए की लूट || अनिश्चितकालीन हड़ताल पर 23 से जाएंगे जूनियर डॉक्टर्स  || मप्र में पहली बार इंदौर में लगेंगे रेडियो फ्रिक्वेंसी स्मार्ट मीटर ||
© Copyright 2016 By Peoples Samachar.