20-08-2018 12:09:pm
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जबलपुर। 75 वर्षीया श्रीमती सरिता गोसार्इं ने आठवीं में स्कूल में प्रवेश से वंचित कर दी गई अपनी पोती चारूलता को स्कूल में प्रवेश दिलाने और उसका एक साल बर्बाद होने से बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया और आखिरकार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की मदद से वे चारू को उसके स्कूल में प्रवेश दिलाने में कामयाब हुईं। प्राधिकरण ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए विधिक सेवा योजना के तहत उन्हें न्याय दिलाया। दरअसल केन्द्रीय विद्यालय ङ्मीमांक एक की छात्रा चारू बीमार होने के कारण स्कूल में लम्बे समय तक उपस्थित नहीं हो सकी थी और परीक्षा भी नहीं दे पाई थी। ऐसे में चारू को उसके स्कूल में पुनरू दाखिला देने से इंकार कर दिया गया था। उसके पापा पूना में नौकरी करते हैं इसलिए दादी सरिता गोसार्इं ने चारू के स्कूल में दाखिले के लिए अपनी अधिक अवस्था के बावजूद भरसक प्रयास किए।

कई चक्कर लगाए स्कूल के

वे कई बार स्कूल पहुंचीं और चारू के एडमिशन के लिए शिक्षकों एवं प्राचार्य से अनुरोध किया तथा अधिकारियों से भी सम्पर्क किया। इस सबके बावजूद अपनी पोती का साल खराब होने के हालात देख हताश दादी ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर पहुंचकर अपनी व्यथा सुनाई और लिखित शिकायत भी प्रस्तुत की।

दस्तावेजों का किया अवलोकन

श्रीमती गोसाईं की व्यथा-कथा से अवगत होने पर जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चंद्रेश खरे ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्राधिकरण के सचिव शरद भामकर को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। श्री भामकर ने शिकायतकर्ता वृद्धा से सहानुभूतिपूर्वक बातचीत कर तथ्यों की जानकारी ली और उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के साथ-साथ केन्द्रीय विद्यालय की नियमावली का अवलोकन किया। तदुपरान्त श्री भामकर ने उपायुक्त केन्द्रीय विद्यालय को चारू को स्कूल में दाखिला देने के लिए पत्र भेजा। साथ ही आयुक्त केन्द्रीय विद्यालय नई दिल्ली एवं मध्यप्रदेश बाल संरक्षण आयोग को भी पत्र के माध्यम से प्रकरण से अवगत कराया। इतना नहीं श्री भामकर ने सम्बन्धित प्राधिकारियों को यह साफ कर दिया कि शिकायत के सम्बन्ध में त्वरित कार्यवाही न किए जाने पर शिकायतकर्ता को विधिक सहायता उपलब्ध कराते हुए हाई कोर्ट में नि:शुल्क रिट याचिका लगाने सम्बन्धी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

दो दिन में मिला प्रवेश

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के गंभीर प्रयासों के चलते दो दिनों में ही शिकायत का निराकरण करते हुए चारू को स्कूल में प्रवेश दे दिया गया। पढ़ने के लिए स्कूल न जा पाने से हताश चारू अब एक बार फिर नए उत्साह से भर उठी है वहीं उसकी दादी भी अपनी कोशिशों के कामयाब होने और पोती का एक साल बेकार होने से बच जाने के कारण बेहद खुश हैं।

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